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ગુરુવાર, 8 સપ્ટેમ્બર, 2011

જાદવ અજીત ભાઇ ડી

(१) कोई मिला ही नहीं जिसको वफ़ा देता !
हर एक ने धोखा दिया किस - किस को सजा देता !!
ये तो हम थे की चुप रह गए वर्ना......!
दास्तान सुनाते तो महफिल को रुला देता !! 
(२) वो हमारे कब थे जो बेगाने हो गए !
ज़रा सी बात थी क्या फ़साने हो गए !!
क्या उसे इलज़ाम दे क्या सुनाये हालेदिल !
अब कोई होगा नया हम पुराने हो गए !!
(३) तू कही भी रह सर पे तेरा इलज़ाम तो हैं !
तेरे हाथों की लकीर में मेरा नाम तो हैं !!
मुझे अपना बना या न बना ये तेरी मर्जी !
पर तू मेरे नाम से बदनाम तो हैं....!!
(४) वक़्त की रफ्तार रुक गई होती !
शरम से आँखे झुक गई होती....!!
अगर दर्द जानती शमा परवाने का !
तो जलने से पहले ही वो बुझ गई होती !!
(५) किसी का दर्द जब हद से गुजर जाता हैं !
समंदर का पानी आँखों में उतर आता हैं !!
कोई तो बना लेता हैं रेत पर भी घर....!
किसी का लहरों में सब कुछ बिखर जाता हैं !!
(१) जला देंगे अपने दिल  को दिये की तरह !
तेरी जिंदगी में रौशनी लाने के लिए.....!!
सह लेंगे चुभन को पैरों तले....!
तेरी राहों में फूल बिछाने के लिए !! 
(२) यादें होती हैं सताने के लिए !
कोई रूठता हैं फिर मनाने के लिए !!
रिश्ता बनाना कोई मुस्किल तो नहीं !
बस जान चली जाती हैं उसे निभाने के लिए !!
(३) आँशु आँखों से कभी गिर न पाए !
न दर्द हो तुझे न कभी चोट आए !!
मेरे हिस्से में ज्यादा ख़ुशी तो नहीं !
पर रब करे वो भी तुझे मिल जाए !!
(४) जुबान खामौश आँखों में नमी होगी !
यही बस एक दास्ता-ऐ-जिंदगी होगी !!
भरने को तो हर जख्म भर जायेंगे !
कैसे भरेगी वो जगह जहाँ आपकी कमी होगी !!
(५) खुशियों से नाराज़ हैं मेरी जिंदगी !
प्यार की मोहताज़ हैं मेरी जिंदगी...!!
हँस लेते हैं दुसरो को दिखाने के लिए !
वर्ना दर्द की खुली किताब हैं मेरी जिंदगी !! 
(१) कहाँ वफा का सिला देते हैं लोग !
अब तो मोहब्बत की सजा देते हैं लोग !!
पहले सजाते हैं दिलो में चाहतों का ख्वाब !
फिर ऐतबार को आग लगा देते हैं लोग !!
(२) कुछ सितारों की चमक नहीं जाती !
कुछ यादों की कसक नहीं जाती....!!
कुछ लोगों से होता हैं ऐसा रिश्ता !
दूर रहकर भी उनकी महक नहीं जाती !!
(३) आज हम भी एक नेक काम कर आए !
दिल की वसीयत किसी के नाम कर आए !!
प्यार हैं उनसे ये जानते हैं वो......!
मज़बूरी थी जो झुकी नज़रों से इनकार कर आए !!
(४) जिसे याद करके ये दिल रो रहा हैं !
वो मुझे तड़पता देख खुश हो रहा हैं !!
चुरा के आँखों से नींद मेरी.....!
वो रातों को चैन से बेखबर सो रहा हैं !!
(५) पलकों पे अपनी बिठाया हैं तुम्हे !
बरी दुवाओ के बाद पाया हैं तुम्हे !!
इतनी आसानी से नहीं मिले हो तुम !
नेशनल जूओलोजिकल पार्क से चुराया हैं तुम्हे !!
(१) कोई मिला ही नहीं जिसको वफ़ा देता !
हर एक ने धोखा दिया किस - किस को सजा देता !!
ये तो हम थे की चुप रह गए वर्ना......!
दास्तान सुनाते तो महफिल को रुला देता !! 
(२) वो हमारे कब थे जो बेगाने हो गए !
ज़रा सी बात थी क्या फ़साने हो गए !!
क्या उसे इलज़ाम दे क्या सुनाये हालेदिल !
अब कोई होगा नया हम पुराने हो गए !!
(३) तू कही भी रह सर पे तेरा इलज़ाम तो हैं !
तेरे हाथों की लकीर में मेरा नाम तो हैं !!
मुझे अपना बना या न बना ये तेरी मर्जी !
पर तू मेरे नाम से बदनाम तो हैं....!!
(४) वक़्त की रफ्तार रुक गई होती !
शरम से आँखे झुक गई होती....!!
अगर दर्द जानती शमा परवाने का !
तो जलने से पहले ही वो बुझ गई होती !!
(५) किसी का दर्द जब हद से गुजर जाता हैं !
समंदर का पानी आँखों में उतर आता हैं !!
कोई तो बना लेता हैं रेत पर भी घर....!
किसी का लहरों में सब कुछ बिखर जाता हैं !!
(१) जला देंगे अपने दिल  को दिये की तरह !
तेरी जिंदगी में रौशनी लाने के लिए.....!!
सह लेंगे चुभन को पैरों तले....!
तेरी राहों में फूल बिछाने के लिए !! 
(२) यादें होती हैं सताने के लिए !
कोई रूठता हैं फिर मनाने के लिए !!
रिश्ता बनाना कोई मुस्किल तो नहीं !
बस जान चली जाती हैं उसे निभाने के लिए !!
(३) आँशु आँखों से कभी गिर न पाए !
न दर्द हो तुझे न कभी चोट आए !!
मेरे हिस्से में ज्यादा ख़ुशी तो नहीं !
पर रब करे वो भी तुझे मिल जाए !!
(४) जुबान खामौश आँखों में नमी होगी !
यही बस एक दास्ता-ऐ-जिंदगी होगी !!
भरने को तो हर जख्म भर जायेंगे !
कैसे भरेगी वो जगह जहाँ आपकी कमी होगी !!
(५) खुशियों से नाराज़ हैं मेरी जिंदगी !
प्यार की मोहताज़ हैं मेरी जिंदगी...!!
हँस लेते हैं दुसरो को दिखाने के लिए !
वर्ना दर्द की खुली किताब हैं मेरी जिंदगी !! 
(१) कहाँ वफा का सिला देते हैं लोग !
अब तो मोहब्बत की सजा देते हैं लोग !!
पहले सजाते हैं दिलो में चाहतों का ख्वाब !
फिर ऐतबार को आग लगा देते हैं लोग !!
(२) कुछ सितारों की चमक नहीं जाती !
कुछ यादों की कसक नहीं जाती....!!
कुछ लोगों से होता हैं ऐसा रिश्ता !
दूर रहकर भी उनकी महक नहीं जाती !!
(३) आज हम भी एक नेक काम कर आए !
दिल की वसीयत किसी के नाम कर आए !!
प्यार हैं उनसे ये जानते हैं वो......!
मज़बूरी थी जो झुकी नज़रों से इनकार कर आए !!
(४) जिसे याद करके ये दिल रो रहा हैं !
वो मुझे तड़पता देख खुश हो रहा हैं !!
चुरा के आँखों से नींद मेरी.....!
वो रातों को चैन से बेखबर सो रहा हैं !!
(५) पलकों पे अपनी बिठाया हैं तुम्हे !
बरी दुवाओ के बाद पाया हैं तुम्हे !!
इतनी आसानी से नहीं मिले हो तुम !
नेशनल जूओलोजिकल पार्क से चुराया हैं तुम्हे !!
(१) चमन से एक बिछरा हुवा गुलाब हूँ !
मैं खुद अपनी तवाही का जवाब हूँ...!!
यूँ निगाहें न फेरना मुझसे !
दर्द के बाज़ार में बिकता हुवा एक लाचार हूँ !! 
(२) पत्थरों से प्यार किया नादान थे हम !
गलती हुई क्योकि इंशान थे हम....!!
आज जिन्हें नज़रें मिलाने में तकलीफ होती हैं !
कभी उसी सक्स की जान थे हम....!!
(३) सुकून-ऐ-जान के लिए दुवा कैसे करू !
दर्द तो उसने दिया हैं, गिला कैसे करू !!
सोचता हूँ कभी की मैं मर जाऊ....!
लेकिन उनको जमाने में अकेला कैसे करू !!
(४) जब ख्वाबो में रिश्ते बनाता हूँ !
तेरे दामन को और करीब पाता हूँ !!
राहे उल्फत मुस्किल हैं मगर...!
तेरी यादों से अपनी साँसे चलाता हूँ !!
(५) भूल जाए तुमको कोई इरादा नहीं हैं !
तेरे सिवा सिकी और से वादा नहीं नहीं हैं !!
निकाल देते दिल से शायद तुमको....!
मगर इस नादान दिल में दरवाजा नहीं हैं !! 
(१) बेवफा होने का ताना न दिया करो !
न मुझसे कोई सिकायत किया करो !!
तुमको क्या पता कितना याद करते हैं !
हिसाब लगाना हो तो अपनी धड़कन गिन लिया करो !! 
(२) मेरे दिल के नाज़ुक धड़कनो को !
तुमने धड़कना सिखा दिया.....!!
जब से मिला हैं प्यार तेरा !
ग़म में भी मुस्कुराना सिखा दिया !!
(३) ahA4�नहाई में जीना अच्छा नहीं लगता !
बिछर के तुम से रहना अच्छा नहीं लगता !!
ये दिल शिर्फ़ तुमको याद करता हैं.....!
हर बार ये बात कहना अच्छा नहीं लगता !!
(४) ऐसा भी नहीं की उससे मिला दे कोई !
कैसी हैं वो बस इतना बता दे कोई....!!
सुखी हैं बरी देर से पलकों की जुवा !
आज की रात तो जी भर के रुला दे कोई !!
(१) आज वो फिर हमें याद आ रही हैं !
रह - रह कर हमें फिर से सता रही हैं !!
कहती थी सदा हँसते रहना आप....!
और खुद ही अपनी याद से मेरा दिल जला रही हैं !!

(२) मेरी उजरी दुनियाँ को तू आबाद न कर !
बीते लम्हों को तू फिर से याद न कर !!
एक कैद परिंदे का हैं तुमसे यही कहना...!
मैं भूल चूका हूँ उरना मुझे फिर से आज़ाद न कर !!

(३) मैं खुद ज़मीन मेरा दिल आसमान का हैं !
टूट के भी मेरा हौसला चट्टान का हैं.....!!
बिछर के मैं उनसे इसलिए नहीं रोया !
वो कह गयी थी ये वक़्त इम्तहान का हैं !!

(४) प्यार मिलता हैं यहाँ किस्मत से !
हर किसी की किस्मत में वफा नहीं होती !!
जिन दिलों में मोहब्बत होती हैं....!
वहा नफरत की जगह नहीं होती !!

(५) कभी दर्द तो कभी दुवा दी हैं !
दिल का चैन आँखों की नींद उरा दी हैं !!
ये तेरी याद हैं या मेरे दर्द का इम्तहान !
जो पलकों के कतरों पे नमी सजा दी हैं !!
(१) इस जहाँ में मोहब्बत काश न होती !
तो सफर-ऐ-जिंदगी में मिठास न होती !!
अगर मिलती बेवफा को सजाए मौत...!
तो दीवानों की कब्र यूँ उदाश न होती !!

(२) जियो उसके लिए जो जीने का सहारा हो !
चाहो उसे जो आपको जान से भी प्यारा हो !!
राह में तो मिलेंगे बहुत साथी लेकिन....!
साथ उसका दो जिसने भीर में आपको पुकारा हो !!

(३) किस कदर मुझको सताते हो तुम !
भूल जाने पे भी याद आते हो तुम..!!
जब भी खुदा से कुछ मांगता हूँ !
मेरे दिल की दुवा बन जाते हो तुम !!

(४) जागते हैं तनहा रातों में !
खोते हैं दिल उनकी बातों में !!
मिली नहीं दिल की मंजिल आज तक !
क्योकि दर्द ही दर्द लिखा हैं इन हाथों में !!

(५) चुपके से धड़कन में उतर जायेंग�h !
राहें उल्फत में हद से गुजर जायेंगे !!
आप जो हमें इतना चाहेंगे.....!
हम तो आपकी साँसों में पिघल जायेंगे !!
(१) झुकी हुई पलकों से उनका दीदार किया !
सब कुछ भुला के उनका इंतज़ार किया !!
वो जान ही न पाई जजबात मेरे.....!
जिसे दुनियाँ में मैंने सबसे ज्यादा प्यार किया !!

(२) हर क़ुरबानी आप पे कुर्बान हैं !
ये जिंदगी भी बस आपके नाम हैं !!
मिला हैं जो इस जहाँ में प्यार आपका !
खुदा का मुझपे ये बहुत बरा एहसान हैं !!

(३) काश जाते वक़्त को हम रोक सकते !
साथ गुजते लम्हों को हम जोड़ सकते !!
कितनी यादें हैं जो आपने दी हमें...!
काश जिंदगी को हम पीछे मोड़ सकते !!

(४) तमाम उम्र बस यही मलाल रहा !
उसका जबाब मेरे वास्ते सवाल रहा !!
जो एक पल भी बिछरने को मौत कहती थी !
वो मेरे बगैर जिन्दा हजार साल रहा !!

(५) मुझको रोते देख कर क्यों परेसान हो !?
ये सबनम तो मेरी आँखों की जान हैं !!
इतने गम के साये लगे हैं मेरे पीछे !
खुद मौत मेरी जिंदगी पे हैरान हैं ...!!
(१) एक हसीन पल की जरुरत हैं हमें !
बीते कल की जरुरत हैं हमें....!!
सारा ज़माना रूठे तो रूठे !
जो कभी न रूठे ऐसे दोस्त की जरुरत हैं हमें !!

(२) तमन्ना बस इतनी है उसका प्यार मिले !
इजहार करे हम तो उसका इकरार मिले !!
बस एक बार वो कह दे सोच कर बतायेंगे !
फिर चाहे सात जन्म का इंतज़ार मिले....!!

(३) एक जैसा दोस्त सारे नहीं होते !
कुछ हमारे होकर भी हमारे नहीं होते !!
आपसे दोस्ती करने के बाद एहसास हुवा !
कौन कहता हैं जमीन पे तारे नहीं होते !!

(४) आपके यादों का महल बनाया हमने !
आरजू का दिया उसमे जलाया हमने !!
भूलने वाले तुझे मेरी कसम.......!
कोई वो लम्हा बता जिसमे तुझे भुलाया हमने !!

(५) कभी उनकी पलकों में मेरा इजहार होगा !
दिल के कोने में मेरा ही प्यार होगा....!!
गुजर रहे हैं रात और दिन उनकी याद में !
कभी तो उनको भी मेरा इंतज़ार होगा !!
(१) उस गुलाब से पूछो दर्द क्या होता हैं !
जो हर वक़्त खामोश ही रहता हैं !!
औरो को देता हैं पैगाम-ऐ-मोहब्बत !
और खुद काँटों की चुभन को सहता हैं !!

(२) वो कहते हैं मजबूर हैं हम !
न चाहते हुए भी दूर हैं हम....!!
चुरा ली उन्होंने धड़कन भी हमारी !
फिर भी वो कहते हैं की बेकसूर हैं हम !!

(३) क्यों बनाया मुझको आए बनाने वाले !
बहुत गम देते हैं ये जमाने वाले....!!
मैंने आग के उजालों में कुछ चेहरों को देखा !
मेरे अपने ही थे मेरे घर जलाने वाले !!

(४) हमें किसी से कोई शिकायत नहीं !
शायद मेरी किश्मत में चाहत नहीं...!!
मेरी तक़दीर को लिखकर उपरवाले मुकर गए !
पूछा तो बोला ये मेरी लिखावट नहीं....!!

(५) हम अपनी जिंदगी ख़ुशी से लुटा दे !
अगर खुदा हमारी उम्र आपको लगा दे !!
और तो कुछ माँगा नहीं हमने खुदा से !
बस हर जन्म में आपको हमारा दोस्त बना दे !!
(१) बागो - बहारो में तुम ही अच्छे लगे !
लेकिन इसमें मेरा कोई कशुर नहीं !!
कशुर हैं तो सिर्फ इस दिल का...!
जिसे हजारो में तुम ही अच्छे लगे !!

(२) हर पल दिल को बहला लेता हूँ !
तन्हाई में खुद को ही दोस्त बना लेता हूँ !!
याद उनको करके मुस्कुरा लेता हूँ !
गुजरे लम्हों को फिर करीब बुला लेता हूँ !!

(३) काश तू चाँद और मैं तारा होता !
आसमा में एक आशियाना हमारा होता !!
लोग तुम्हे दूर से देखते....!
नजदीक से देखने का हक बस हमारा होता !!

(४) रब उसे ऐसी तन्हाई न दे !
हम जी लेंगे तन्हा पर उसे तन्हाई न दे !!
इन निगाहों में बसी रहे उसकी सूरत !
भले मेरी सूरत उसे दिखाई न दे !!

(५) लगता हैं कोई हमसे खपा हैं !
पर यकिन हैं उसकी हर साँस में वफ़ा हैं !!
नहीं हैं उस जैसा कोई दुनियाँ में !
तभी तो उस पर ये जान फिदा हैं !!

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